लिक्विड फंड क्या होते हैं? यह कैसे काम करते हैं?

Rate this post

ज्यादातर लोग अपनी सेविंग को अपने बैंक अकाउंट में रखते हैं. जिस पर हमें सिर्फ 3.5 से 4% का Yearly रिटर्न मिलता है. पर अगर हमें अपनी सर्विस पर 7 से 8 % का रिटर्न बनाने का मौका मिल रहा है. तो क्या हम इसका फायदा नहीं उठाना चाहेंगे. जी हां आज हम बात करेंगे लिक्विड फंड के बारे में हम जानेंगे कि लिक्विड फंड क्या होते हैं? यह कैसे काम करते हैं? और हमें इन में क्यों इन्वेस्ट करना चाहिए?

लिक्विड फंड क्या होते हैं? (What is Liquid Fund)

आइये जानते हैं कि लिक्विड फंड (Liquid Fund) क्या होते हैं, लिक्विड फंड्स एक तरह के Debt Mutual Fund (डेब्ट म्यूच्यूअल फंड) होते हैं, जो पब्लिक या प्राइवेट सॉर्ट टर्म डेब्ट (Private Short Term) में इन्वेस्ट करते हैं और उन डेब्ट पर जो इंटरेस्ट मिलता है वही लिक्विड फंड का रिटर्न होता है.

लिक्विड फंड्स जिन डेब्ट पर इन्वेस्ट करते है, उन की Maturity का Duration 1 दिन से लेकर मैक्सिमम 91 दिनों तक हो सकता है, यानिकि लिक्विड फंड्स 91 दिनों तक इन्वेस्टमेन्ट की डेब्ट में इन्वेस्ट नहीं करते हैं. लिक्विड फंड Commercial Papers, Co-Operative Debt, E-Bills, Short Term Debt. इन सब चीजों में इन्वेस्ट करते हैं पर क्योंकि इन चीजों में इंटरेस्ट पहले से फिक्स होता है इस वजसे लिक्विड फंड्स में इक्विटी फंड की Comparison में रिस्क बहुत ही कम होता है.

Also Read:  Best Index Funds in India - A Beginner's Guide

दोस्तों हमें बैंक में अपने सेविंग अकाउंट में रखे पैसों पर 3.5 से 4% Yearly Interest मिलता है, वही लिक्विड फंड्स में हमें Yearly 7 से 8 % इंट्रेस्ट मिलता है. जो कि हमारे सेविंग अकाउंट से लगभग डबल है. इस तरह लिक्विड फंड्स में हम अपने अकाउंट केस को सेविंग अकाउंट के कंपैरिजन में ज्यादा अच्छे से यूज कर सकते हैं.

यहां आपको एक बात ध्यान देने वाली है, कि हर साल इन्फ्लेशन (Inflation) लगभग 5% की रेट से बढ़ रही है, यानी हमारे पैसों की वैल्यू हर साल लगभग 5% से कम होती जा रही है. अगर ऐसे में हम अपने पैसों को 3.5 से 4% इयरली इंटरेस्ट वाले सेविंग अकाउंट में रखेंगे तो हमारे पैसों की वैल्यू हर साल सिर्फ रखे रखे ही 1 से 1.5% कम हो जाएगी.

इस लिए हमें सिर्फ अपने पैसों की वैल्यू को Maintain रखना है. तो हमें कम से कम इन्फ्लेशन रेट कि जितना Yearly रिटर्न अपनी Saving पर चाहिए ही चाहिए.

लिक्विड फंड को इन्वेस्ट करना एक नॉर्मल म्युचुअल फंड (Normal Mutual Fund) में इन्वेस्ट करने के जैसा ही होता है. हम किसी भी म्युचुअल फंड इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म पर जाकर अपना अकाउंट ओपन करवा सकते हैं और किसी भी लिक्विड फंड्स में अपने पैसों को इन्वेस्ट करके अपनी सेविंग से स्टार्ट कर सकते हैं.

इसके साथ ही लिक्विड फंड में अपने पैसों को 24 घंटे के अंदर ही आसानी से निकाल सकते हैं जो नॉर्मल म्युचुअल फंड (Normal Mutual Fund) के 3 दिन का टाइम से काफी कम होता है, और इसी वजह से ही ऐसे फंड को हम लिक्विड फंड से बोलते हैं.

Also Read:  15 x 15 x 15 Rule of Mutual Funds

Things to consider before investing in liquid funds

तो दोस्तों अब हम लिक्विड फंड से जुड़ी कुछ इंपॉर्टेंट पॉइंट्स को अच्छे से समझते हैं

Risk (रिस्क)

लिक्विड फंड्स में रिस्क, किसी भी इक्विटी फंड से बहुत कम तो होता है पर ऐसा नहीं है कि लिक्विड फंड्स में रिस्क है ही नहीं. अगर लिक्विड फंड ने जिस कंपनी के बोर्ड में इन्वेस्ट किया है वह कंपनी Bankrupt हो जाए तो, उस लिक्विड फंड के रिटर्न थोड़े कम हो सकते हैं. पर ऐसा बहुत कम होता है और लिक्विड फंड रिटर्न का चार्ट धीरे धीरे और लगातार ऊपर ही जाता है.

Return (रिटर्न)

लिक्विड फंड्स को हमें एक इन्वेस्टमेंट से ज्यादा एक सेविंग फंड की तरह देखना चाहिए क्योंकि इसके रिटर्न किसी भी सेविंग अकाउंट से काफी ज्यादा होते हैं, पर इक्विटी फंड से काफी कम सेविंग अकाउंट जहां 3.5 से 4% Yearly रिटर्न देते हैं. वही इक्विटी म्युचुअल फंड 12 से 15% रिटर्न देते हैं पर इक्विटी म्युचुअल फंड लिक्विड फंड से कहीं ज्यादा रिस्की होते हैं.

स्ट्रोक मार्केट में उतार-चढ़ाव होने से उन पर काफी इफेक्ट पड़ता है लेकिन लिक्विड फंड कभी भी स्टॉक में निवेश नहीं करते हैं और इसी वजह से इनकी रिटर्न कम जरूर होते हैं पर इक्विटी म्युचुअल फंड की Comparison में बहुत स्टेबल और कंसिस्टेंट होते हैं.

Expense Ratio or Cost (एक्सपेंस रेश्यो)

एक्सपेंस रेशियो (Expense Ration) वो कॉस्ट (Cost)  होता है, जो म्युचुअल फंड हमसे Yearly हमारे पैसों को मैनेज करने के लिए लेती है और क्योकि लिक्विड फंड के रिटर्न इक्विटी फंड के रिटर्न से बहुत कम होते हैं. इस वजह से हमें उन लिक्विड फंड में इन्वेस्ट करना चाहिए जिसका एक्सपेंस रेशियो सबसे कम हो, क्योकि एक्सपेंस रेसिओ में जितना कम फीस देंगे वह हमारे रिटर्ंस में ही ऐड होगा जनरली लिक्विड फंड्स के एक्सपेंस रेश्यो 0.10% से लेकर 0.5% तक होते हैं और किसी भी फंड में निवेश करने से पहले चाहे वह लिक्विड फंड हो या इक्विटी फंड या कोई और हम एक्सपेंस रेश्यो को जरूर देखना चाहिए.

Also Read:  India Focused Offshore Fund Exits ETF in 12th Quarter

Investment Horizon (इन्वेस्टमेंट का समय)

Investment Horizon यानी कि हम कितने टाइम के लिए इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं, लिक्विड फंड में अक्सर वैसे पैसे इन्वेस्ट करना चाहिए जिसकी जरूरत हमें 1 साल में होगी यानी हमें जैसा बताया कि लिक्विड फंड्स को हमें एक सेविंग फंड या इमरजेंसी फंड के फॉर्म में यूज करना चाहिए, क्योंकि अगर हम अपने पैसों को ज्यादा लंबे समय के लिए निवेश कर सकते हैं जैसे 3 साल या 5 साल तो फिर हमें एक इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए.

क्योंकि 3 से 5 साल में हमें इक्विटी मिटुअल फंड का काफी अचे रिटर्न मिल सकते हैं. इस तरह लिक्विड फंड्स हमारे सेविंग यानि केस के लिए एक बहुत अच्छा ऑप्शन है और हम इनमें निवेश करके अपने पैसों को इंप्रेशन से भी बचा सकते हैं जो हमारे देश का सबसे बड़ा दुश्मन होता है.

Leave a Comment